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Wednesday, October 7, 2020

When Regular Trains will start | भारत में पहले की तरह रेलगाड़ियां कब से चलेगी |

New Delhi: 22 मार्च को पूरे भारत में जनता कर्फ्यू लगा था और तब से ही रेलगाड़ियाों का संचालन बंद कर दिया गया था। कोरोना वायरस की वजह से रोजाना चलने वाली रेलगाड़ियां आज रेलवे स्टेशनों पर खड़ी है। गिनती की कुछ स्पेशल रेलगाड़ियों को ही संचालित किया जा रहा है।


When Regular Trains will start | भारत में पहले की तरह रेलगाड़िया कब से चलेगी |


देश में आनलॉक की प्रक्रिया शुरु होकर 5वें स्टेज में आ गई है और कई तरह की सेवाओं का संचालन शुरु भी हो गया है लेकिन रोजाना चलने वाली लोकल ट्रेन के संचालन के बारे में कोई जानकारी अभी तक रेल मंत्रालय ने साझा नहीं की है।

लोकल ट्रेन के ना चलने से लोगों को आस पास की यात्रा के लिये दूसरे साधनों पर निरभर होना पड़ रहा है जिससे उनका खर्चा भी बढ़ गया है।

लोगों को सोशल मीडिया पर रेलवे से जुड़ी अफवाहों ने भी परेशान कर रखा है। कभी लोगों को सुनने को मिलता है कि फलां तारीख से सभी ट्रेनों का संचालन शुरु हो जायेगा। लेकिन फलां तारीख आने के बाद भी ऐसा कुछ नहीं होता।


असल में बात यह है कि रेलगाड़ियों का पहले के जैसा संसाचलन कब से होगा इश पर रेलवे मंत्रालय की तरफ से कोई बात नहीं की गई है। रेलवे मंत्रालय ने कहा है कि धीरे धीरे रेलगाड़ियों का संचालन किया जायेगा और 15 दिन पहले यह जानकारी बता दी जायेगी।

Saturday, September 12, 2020

Declining Credibility of National News Channels | कुछ पढ़े लिखे पत्रकारों की घटिया पत्रकारिता।

 New Delhi: एक प्रेमी युगल किसी मनमुटाव के चलते अलग हो गया। फिर उनमें से एक ने आत्महत्या जैसा कदम उठाकर अपना जीवन समाप्त कर लिया। लोगों को उस लोकप्रिय व्यक्ति के चले जाने का बहुत दुख हुआ। उसके परिवार पर तो दुखों का पहाड़ टूट गया। खैर मामला अब यह मामला किसी दूसरे मोड़ पर चला गया है। लेकिन इस बीच जो कुछ बड़े बड़े समाचार चैनलों ने किया उससे एक जिम्मेदार दर्शक को यह तो पता चल गया कि घटिया पत्रकारिता को देखने से अच्छा है किसी मनोरंजक चैनल को देख लिया जाये। क्योंकि समाचार में सिर्फ एक ही खबर है। हत्या, नैपोटिजम्,  से होते हुये यह मामला अब ड्रग्स पर आ पहुंचा है। इससे पहले एक अमेरिकी पैरानोर्मलिस्ट ने भी इस पर खूब वाहीवाही लूटी। भारत का कोई तान्त्रिक ऐसा दावा करता, तो उसके 206 अस्थी पंजर घट-बढ जाते।


Declining Credibility of National News Channels

समाचार पत्रों की बात हो या चैनलों की सब कोई इस कदर गिर गया है कि होड़ सी लग गई है कौन सबसे ज्यादा नीचे गिरता है। 

एक तो वैसे भी ख़बरी मीडिया जगत में सैलरी का बहुत लोचा है

टीवी चैनलों के पत्रकार ऊपरी दबाब के चलते घटिया पत्रकारिता करने को मजबूर हैं। एक तो वैसे भी ख़बरी मीडिया जगत में सैलरी का बहुत लोचा है। एक महीने की सैलरी तीन महीने के बाद मिलती है और कभी भी अचानक नौकरी भी राम को प्यारी हो जाती है।

मीडिया की ख़बरों को मसालेदार बनाने वाले बड़े-बड़े लोगों को अफनी TRP देखनी होती है, उनके नीचे काम कर रहे लोगों की परेशानी और मजबूरी नहीं। 

यह बात कोई नई नहीं है जब से टीवी चैनल में समाचार का 24x7 प्रसारण हुआ है उसके उसके महीनों के बाद से इसी तरह की घटिया सोच की पत्रकारिता ने जन्म लिया है।

हमारे देश की सेना को इतनी जानकारी अपने बारे में नहीं है जितनी ये समाचार चैनल अपने प्राइम शो में दे डालते हैं। 

हमारे देश के कई नौजवान सराकारी नौकरी के परीक्षा परिणाम के लिये प्रोटेस्ट करते हैं, तो वो खबर इनके लिये आधारहीन हो जाती है। कुछ इक्का दुक्का चैनल इन जरुरी खबरों को प्रसारित करके, इस मरी हुई पत्रकारिता को ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहे हैं।

आप लोगों का आज के समाचार चैनलों के बारे में क्या सोचना है?  


Tuesday, August 11, 2020

Order to make the world's most expensive mask | Corona से बचाव के लिये दिया गया सबसे मंहगे मास्क का आर्डर | इतनी ज्यादा है कीमत |

New Delhi: Coronavirus के प्रकोप ने दुनिया के हर देश को अपनी ज़द में लिया है और इसकी वजह से लोग जागरुक भी होने लगे हैं। Hand Sanitizer, Social Distancing, Mask ये सब अब सबसे आवश्यक वस्तुओं में शामिल हो गया है।

जिस जिस देश ने इन बातों का अच्छे से पालन किया वहां coronavirus का संक्रमण कम हो गया और कुछ कुछ देशों में तो लगभग 100 दिनों से कोई नया मामला इस वायरस से जुड़ा सामने नहीं आया। 

इस महामारी ने लोगों को मास्क की उपयोगिता का एहसास करा कर एक नया फैशन ट्रैंड सेट कर दिया है। बाजार में 10 रुपये से लेकर कुछ हजार रुपये तक की कीमत के मास्क उप्लब्ध हैं। हाल ही में मुम्बई में सबसे महंगा मास्क पहने व्यक्ति सुर्खियों में रहा था लेकिन अब खबर इजराइल से आ रही है कि दुनिया का सबसे महंगा मास्क बनाने का आर्डर यहां की एक jewelry company  को मिला है।

Corona से बचाव के लिये दिया गया सबसे मंहगे मास्क का आर्डर

Israeli jewelry company Yvel को एक व्यक्ति ने दुनिया का सबसे महंगा मास्क बनाने का आर्डर दिया है। इस मास्क डिजाइन करने वाले डिजाइनर आइजैक लेवी का कहना है कि इस मास्क को बनाने में 18 कैरेट गोल्ड और 3600 काले और सफेद हीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस शानदार मास्क में Top Rated N99 फिल्टर लगाया गया है। इस मास्क की कीमत 1.5 मिलीयन डॉलर बताई जा रही है जो कि भारतीय रुपये में 11 करोड़ रुपये के बराबर होती है।

Friday, July 31, 2020

Shakuntala Devi the human computer | जानिए कौन थी शकुन्तला देवी ।

New Delhi: भारत में महिलाओं को गणित में कमजोर मानने की सोच काफी पुरानी है। लेकिन एक महिला ने अपनी प्रतिभा से इस घटिया सोच को बदल कर रख दिया। 4 नबम्बर 1929 को बंगलुरु में  कन्नड़ परिवार में एक लड़की का जन्म हुआ और नाम ऱखा गया शकुन्तला। परिवार के बड़े-बुजुर्ग को हाथ की लकीरों को पढ़ना आता था, तो उन्होने नन्ही सी लड़की की हाथ की रेखाओं को देखकर बताया कि इस को भगवान का आशीर्वाद है, आगे चलकर यह बहुत नाम कमायेगी।

Shakuntala Devi the human computer
 
शकुन्तला के पिता एक सर्कस में काम करते थे। वह अपनी बेटी की प्रतीभा को पहचानने वाले सबसे पहले व्यक्ति थे। उनकी अंको को याद रखने की याददाश्त कमाल की थी। चार साल की उम्र में शकुन्तला अपने मुहल्ले में इसी प्रतिभा की वजह से जानी जाने लगी।  चार साल की उम्र में  ही यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर में एक बड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया और यही उनकी देश-विदेश में गणित के ज्ञान के प्रसार की पहली सीढ़ी बना। 
 एक न्यूज संस्थान को दिये इंटरव्यब में शकुन्तला देवी ने बताया था कि कभी स्कूल नहीं गई। अंग्रेजी, तमिल, हिन्दी भाषा अभ्यास करके सीखी गई है।

Shakuntala Devi the human computer

अमरीका में साल 1977 में शकुंतला देवी ने कंप्यूटर से मुक़ाबला किया। 188132517 का घनमूल बता कर शकुंतला देवी ने जीत हासिल की। उन्होंने 13 अंक वाले दो नंबरों का गुणन केवल 28 सेकंड में बता कर 1982 में अपना नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज करा लिया।

Shakuntala Devi the human computer

ह्यूमन कंप्यूटर नाम से मशहूर शकुंतला देवी गणित के अलावा कुकरी पर भी किताबें लिख चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 1977 में दी वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्शुअल्स किताब लिखी जिसे भारत में समलैंगिकता पर पहली किताब भी कहा जाता है।
ऐसी प्रतिभावान भारतीय गणितिज्ञ, मानव कम्प्यूटर और लेखिका शकुन्तला देवी ने 21 अप्रैल 2013 को 83 वर्ष की आयु में बंगलुरु के अस्पताल में आखिरी सांस ली।

Shakuntala Devi the human computer

अब इस महान हस्ती की कहानी को फिल्मी परदे पर प्रस्तुत किया जा रहा है। 31 जुलाई को प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही फिल्म शंकुन्तला देवी में विद्या बालन ने इसमें मुख्य किरदार निभाया है। 

Thursday, July 30, 2020

Rafale vs J20 | कौन है युद्ध का विजेता |

New Delhi: कई सालों से Dassault Rafale को भारतीय वायुसेना में शामिल करने की प्रक्रिया को 29 जुलाई को पूरा कर लिया गया।

Dassault Rafale

36 राफेल फाइटर जेट की पहली खेप के 5 जेट अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर लैंड हुये। रक्षा विशेषयज्ञों का मानना है कि इन game changer जेट से भारतीय वायुसेना की ताकत दो गुनी हो गई है। हाल ही में चीन अपनी षड़यंत्रकारी चालों से भारत के लिये परेशानी खड़ी कर रहा था लेकिन अब वह ऐसा नहीं कर सकेगा।
राफेल के भारत पहुंचते ही चीन को अपनी वायु शक्ति को आंकने के लिये मजबूर कर दिया है।
दरअसल चीन के पास 5th जनरेशन का फाइटर प्लेन  Chengdu J-20  है। जो कि रडार को चकमा देने वाली तकनीक से लैस है। दुनिया में तीन ही 5th जनरेशन के फाइटर जेट हैं। F-22 रैपटर (अमेरिका), F-35 (अमेरिका) और Chengdu J-20 (चीन)। 

Rafale vs J20


भारतीय वायुसेना में शामिल Dassault Rafale जेट 4.5th जनरेशन का है लेकिन इसमें वह सब कुछ है जो कि एक 5th जनरेशन के जेट में होता है। राफेल फाइटर जेट को game changer भी कहा जाता है क्योंकि यह फाइटर जेट युद्ध में कई तरह की भूमिका एक साथ निभा सकता है। मतलब यह है कि ये फाइटर जेट एक बार की उड़ान में कई तरह के अटैक एक साथ करके दुश्मनों में दहशत फैला देता है। और सबसे खास बात यह है कि राफेल 5th जनरेशन के फाइटर जेट को आसानी से टारगेट कर सकता है। पूर्व भारतीय वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने एक इंटरव्यू में कहा कि चीन की ताकत को कम नहीं आंका जा सकता लेकिन यदि युद्ध की स्थिति आती है तो चीन का फाइटर जेट J-20 कहीं भी rafale के सामने नहीं टिक सकता।

एक नजर राफेल और J-20 पर

Dassault Rafale                                   Chengdu J-20
ट्विन इंजन                     इंजन             ट्विन इंजन
सिंगल सीट                      सीट               सिंगल सीट
मल्टी रोल फाइटर जेट    मुख्य काम       स्टील्थ जेट
24,500 किलोग्राम          टेकऑफ वेट     34,000 से 37,000 किलोग्राम
3700 किलोमीटर            रेंज                  3400 किलोमीटर (दूरी बढाई जा सकती है)
2130 किलोमीटर/घंटा     स्पीड               2100 किलोमीटर/ घंटा
4 मिसाइल                     मिसाइल लोड   4 मिसाइल

Wednesday, July 29, 2020

is easy to earn money online | क्या ऑनलाइन पैसा कमाना आसान है |

New Delhi: अपनी earnings को कौन नहीं बढ़ाना चाहता। हर इटरनेट यूज़र की इच्छा होती है कि वह ऑनलाइन पैसा कमाये। आजकल ऑनलाइन पैसा कमाने के कई सारे इटरनेट प्लेटफार्म मौजूद हैं। सोशल मीडिया से लेकर कई तरह के सर्वे तक। कभी टिकटॉक ने भी कई लोगों को स्टार बनाकर उनकी किस्मत को चमका दिया था लेकिन अब भारत सरकार टिकटॉक के साथ कई चीनी एपलीकेशन्स को बैन कर चुकी है।

is easy to earn money online

लोगों में ऑनलाइन पैसा कमाने की इच्छा इस कदर हावी है कि वे इसके लिये अपना कीमती समय बरबाद कर देते हैं।
ऐसा नहीं है कि ऑनलाइन पैसा कमाया नहीं जा सकता। इस माध्यम से अच्छा खासा पैसा लोग कमा भी रहे हैं लेकिन उन लोगों की संख्या कम है। इश तरह से समझिये कि एक छोटी से प्राइवेट नौकरी का मिलना जितना आसान है उतना ही आसान ऑनलाइन पैसा कमाना है। लेकिन एक बात पर और ध्यान दीजिये। 
और वह बात यह है कि छोटी प्राइवेट नौकरी ज्यादा काम में छोड़े पैसे देगी ठीक ऐसा ही यहां है। आप इटरनेटर पर बहुत मेहनत करोगे और कमाई ना के बराबर होगी।
ऑनलाइन पैसा अच्छा कमाने के लिये थोड़ा वक्त जरुर लगेगा। यह मानकर आप youtube, facebook page, website, online game earning, पर अपना समय जरुर लगा सकते हैं। 

Saturday, July 25, 2020

Some women set an example of women empowerment in India. महिलाएं खुद पर करें विश्वास, सिंगर स्वाति घोष ने बताई संघर्ष की दास्तां।

Bengaluru: देश की महिलाएँ पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। अपने सपनों को नया आयाम दे रहीं हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं की संघर्ष की कहानी एक मिसाल बनती जा रही है। देश के साथ-साथ परिवार का नाम रोशन करने में महिलाएं पीछे नहीं हैंं। पुरानी प्रथा की जंजीरों को तोड़ कुछ कर दिखाने, पहचान बनाने का जज्बा ही देश को महिला सशक्तिकरण की ओर ले जा रहा है।

Singer Swati Ghosh

इस बारे में वोकल म्यूजिक टीचर स्वाति घोष से जब बात हुई तो उन्होंने बताया कि महिलाओं को सिर्फ चौखट तक नहीं सीमित रहना चाहिए। आज के इस दौर में अपने पैरों पर खड़े होने की बहुत जरूरत है। हुनर को पहचान कर उसे तराशने की जरूरत है। महिलाओं को संदेश देते हुए उन्होंने अपने संघर्ष का एक जीता जागता उदाहरण पेश किया।
Swati Ghosh

पेशे से  गायिका स्वाति घोष बेंगलुरू में रहती हैं। बहुत सी विपरीत परिस्थितियाँ होने के बाद भी अपने हुनर और ख्वाबों को पूरा करने में जुटीं हैं। देश हुनरमंदों से भरा पड़ा है। स्वाति घोष का सपना है एक गायिका के रुप में पहचान बनाने की। जिसे लेकर वह लगातार मेहनत भी कर रहीं हैं। 7 साल की उम्र में स्वाति ने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी।
Swati Ghosh
संगीत को अपना सबकुछ मानने वाली स्वाति से जब इस बारे में बात हुई तो उन्होंने बताया कि सबसे पहले मेरी माँ ने मेरे हुनर को पहचाना और मुझे संगीत क्लास में एडमिशन दिलाया। संगीत से लगाव धीरे धीरे मेरे अंदर बढ़ता गया। जिसे लेकर मेहनत करने लगी। स्वाति ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ उनकी संगीत की शिक्षा भी चल रही थी। पढ़ाई खत्म होते ही कुछ विपरीत परिस्थितियों का भी उन्हें सामना करना पड़ा। जिसके कारण उन्हें नौकरी करनी पड़ी। इस दौरान संगीत को समय न द पाने के कारण उनके दिल में हमेशा मलाल रहता। परिवार, काम और विवाहिक जीवन ने संगीत से दूरी बनाने का काम किया। लेकिन कहते हैं हुनर कभी नहीं खत्म होता बस उसे तराशने की देर है। संगीत से लगाव ने स्वाति को जॉब छोड़ने पर मजबूर कर दिया। नौकरी छोड़ने के बाद संगीत को अपनी दुनिया बनाने वाली स्वाति आज बेंगलुरु में वोकल म्यूजिक टीचर हैं। साथ ही कई प्लेटफार्म पर पर्फोर्मेंस भी किया है। अब वह SG Music Academy में बच्चों को संगीत की शिक्षा देती हैं। स्वाति का कहना है कि सपनों में अभी रंग भरना शुरू किया है। अपनी इस सफलता के पीछे उन्होंने अपनी माता और गुरु गीताश्री भट्टाचार्य को बताया।  मेरा ख्वाब है कि एक प्लेबैक सिंगर के रूप में खुद को सामने लाऊँ। जिसके लिये संघर्ष जारी है।
women empowerment in India