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क्या भविष्य की पृथ्वी बनेगा मंगल ग्रह?

 New Delhi: मानव जाति का विकास कैसे हुआ? क्या यह जाति किसी दूसरे ग्रह से धरती पर आयी है ? ना जाने कितने ही सवाल लोगों के मन में होगें जिनका कोई सटीक जबाब नहीं मिला है लेकिन मानव की भविष्य की धरती के लिये मंगल को खास समझा जा रहा है।


क्या भविष्य की पृथ्वी बनेगा मंगल ग्रह?

क्या भविष्य की पृथ्वी बनेगा मंगल ग्रह.....यदि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की माने, तो ऐसा जरुर होगा। यह होगा कैसे इसको साधारण और सरल भाषा में समझते हैं।

हमारी पृथ्वी के अलावा एक यही लाल ग्रह ऐसा है जिसकी लगभग हर भौगोलिक स्थिति हमारी पृथ्वी से मिलती जुलती है लेकिन दूसरे ग्रहों के साथ ऐशा नहीं है किसी का तापमान बहुत ज्यादा गर्म है तो किसी पर एसिड की बारिश होती है।

मंगल ग्रह को ही क्यों चुना


इसके पीछे का कारण यह है कि जीवन के लिये पानी का होना आवश्यक है और लाला ग्रह (मंगल) पर पानी प्रचुर मात्रा में मौजूद है। यहां पानी बर्फ के रुप में जमीन के नीचे है। इसके उत्तरी ध्रुव पर ग्लेशियर भी है जिसकी वजह से वैज्ञानिक इसको भविष्य की पृथ्वी के रुप में देख रहे हैं।

मंगल पर तापमान की बात की जाये तो यहां पर औसत तापमान -60 सेल्सियस से -140 सेल्सियस तक रहता है। यहां भी पृथ्वी की तरह मौसम चक्र चलता है। 
यहां की जमीन भी पृथ्वी की तरह कठोर और चट्टानी है। मंगल की मिट्टी लाल रंग की है जिसकी वजह है मिट्टी में आयरन ऑक्साइड (iron oxide) का होना। सीधे शब्दों में कहा जाये, तो इस ग्रह की मीटी में मौजूद लोह तत्वों पर जंग लगी हुई है जिसकी वजह से यह लाल रंग का दिखता है।

मंगल ग्रह पर 1967 से कई मिशन अब तक दुनिया की अंतरिक्ष ऐजेसी भेज चुकी है और सफलता भी मिली है जिसकी वजह से ही वैज्ञानिक इश निष्कर्ष पर पहुंच पाये हैं कि मानव आने वाले समय में मंगल पर भी रहेगा।

कितना समय और लगेगा 

वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल को पृथ्वी के जैसा वतावरण बनाने के लिये लगभग 1000 साल लग जायेगे लेकिन यदि यहां पर प्रयोगशाला खोलने बात की जाये, तो लगभग 50 साल के लगभग यहां पर मानव रह सकता है और प्रयोग कर सकता है। 
वहीं कुछ दूसरे वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इसके उत्तरी ध्रुव पर मौजूद वर्फ पिघलना शुरु हो जाये, तो लगभग 100 सालों में वहां कुछ जरुरी प्रोयागात्मक तरीके से रहा जा सकता है।

अब इन बातों को सरल तरीके से समझते हैं। दरअसल मंगल का वातावरण काफी पतला है जिसकी वजह से वहां पर अंतरिक्ष से कई तरह का रेडिएशन होता रहता है जो कि हमारे लिये काफी घातक है। हमारी पृथ्वी की सुरक्षा के लिये तो ओजोन लेयर है जो इश तरह के रेडिएशन को रोक देती है पर मंगल पर ऐसा कुछ नहीं है। आये दिन वहां पर उल्कापिंड गिरते रहते हैं जो कि हमारे लिये तो खतरनाक ही है। 
तो भईया वैज्ञानिक यही कह रहे हैं कि इस ग्रह के वातावरण में कुछ छेड़छाड़ की जाये। और वैसे भी साल 2024 तक मानव मिशन मंगल मिशन के लिये तैयार भी हो जायेगा। 
ना जाने कौन वह भाग्यशाली व्यक्ति होगा जिसे मंगल पर जाने का मैका मिलेगा।

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